चुनाव आयोग की अचानक बदली नई गाइडलाइन से सरगुजा में मतदाता सूची पर विवाद : Election Commission’s sudden change in guidelines sparks controversy over voter list in Surguja

Uday Diwakar
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Election Commission’s sudden change in guidelines sparks controversy over voter list in Surguja: सरगुजा:​​​अंबिकापुर। ​​दावा-आपत्ति प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचते ही चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को लेकर नई गाइडलाइन जारी की, जिसने सरगुजा जिले में हड़कंप मचा दिया। ए और बी श्रेणी के मतदाताओं को अब जांच के दायरे में लाया गया है, जो पहले सुरक्षित थे। इससे सरगुजा में दो लाख से अधिक और अंबिकापुर विधानसभा में 70 हजार मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।​

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR 2026) अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत मतदाता सूचियों का अद्यतन किया जा रहा है, जिसमें दस्तावेज सत्यापन अनिवार्य है। सरगुजा जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, SIR ड्राफ्ट रोल 2026 जारी हो चुका है, लेकिन अंतिम चरण में अचानक ए-बी श्रेणी के मतदाताओं को शामिल करने से विवाद भड़क गया।​

ये श्रेणियां आमतौर पर वे मतदाता होते हैं जिनके नाम पहले सत्यापित माने जाते थे। नई गाइडलाइन में आधार, वोटर आईडी या राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों की जांच होगी, लेकिन आयोग को अस्वीकार करने का अधिकार है। छत्तीसगढ़ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने SIR 2026 को “आपका नाम, आपकी पहचान” का नारा दिया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे अन्यायपूर्ण बताया जा रहा है।​

सरगुजा जिला, जो आदिवासी बहुल है, में दो लाख से ज्यादा मतदाता प्रभावित होने का अनुमान है। अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र में यह संख्या 70 हजार से ऊपर बताई जा रही है। जिले के बूथ-वार मतदाता सूची डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन कई ग्रामीण मतदाताओं के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं।

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स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। सरगुजा संसदीय क्षेत्र के निर्वाचन डेटा में पहले से ही मतदान केंद्रों का युक्तियुक्तकरण हो चुका है, लेकिन SIR से नाम कटने का डर व्याप्त है। जिला हेल्पलाइन 1950 पर शिकायतें बढ़ गई हैं।​

विपक्षी दल इस कदम को “मताधिकार चोरी” बता रहे हैं, जैसा बिहार और यूपी में देखा गया। सरगुजा में स्थानीय नेता दावा कर रहे हैं कि यह आदिवासी वोट बैंक को निशाना बनाने की साजिश है। कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने आयोग से गाइडलाइन वापस लेने की मांग की है।​

सामाजिक संगठन फर्जी मतदाताओं पर चिंता जताते हुए भी वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने से चिंतित हैं। सुप्रीम कोर्ट में समान मुद्दों पर सुनवाई हो चुकी है, जहां आयोग को कारण बताने के निर्देश दिए गए। छत्तीसगढ़ में भी कानूनी चुनौती की संभावना है।​

SIR 2026 से फर्जी वोटरों की सफाई होगी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेजीकरण की कमी समस्या पैदा करेगी। छत्तीसगढ़ CEO की फेसबुक पोस्ट में SIR कार्यक्रम का उल्लेख है, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं। सरगुजा में 2025 के पूरक रोल पहले ही जारी हो चुके हैं।​

आंकड़ों पर नजर डालें तो सरगुजा जिले में कुल मतदाता संख्या लाखों में है, जिसमें SIR से 10-15% प्रभावित हो सकते हैं। अंबिकापुर जैसे क्षेत्रों में युवा और महिला मतदाता सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। आयोग का हेल्पलाइन नंबर 1950 सक्रिय है।​

Election Commission’s sudden change in guidelines sparks controversy over voter list in Surguja

जिला प्रशासन ने BLOs को घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने के आदेश दिए हैं। दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख नजदीक आ रही है, इसलिए प्रभावित मतदाताओं को जल्द दस्तावेज जमा करने की सलाह दी जा रही है। सरगुजा कलेक्टर कार्यालय में विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।​

अगर नाम कटता है तो अपील का विकल्प उपलब्ध है। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल संदिग्ध नाम ही हटेंगे। लेकिन विवाद सुलझे बिना स्थानीय चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। जनता आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रही है।


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