Ambikapur: Mustard oil produced by self-help groups under NRLM: सरगुजा:अंबिकापुर। 13 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग प्रदान करने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस पहल के तहत ’36 कला’ ब्रांड विकसित किया गया है, जिसमें प्रदेश के 26 जिलों से चयनित 26 विशिष्ट उत्पादों को एकसमान गुणवत्ता मानकों, आकर्षक पैकेजिंग और प्रमोशन के माध्यम से बाजार में स्थापित किया जाएगा। सरगुजा जिले से चयनित सरसों तेल इस योजना का प्रमुख हिस्सा बनेगा, जो बतौली और लुंड्रा विकासखंडों के स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित हो रहा है।
राज्य सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ’36 कला’ ब्रांड को एक सुव्यवस्थित रणनीति के रूप में तैयार किया है। इस ब्रांड के तहत उत्पादों का चयन पारंपरिकता, शुद्धता और बाजार क्षमता के आधार पर किया गया। सरगुजा जिले का सरसों तेल न केवल स्थानीय स्तर पर प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी शुद्धता और पारंपरिक निष्कर्षण विधि इसे विशेष बनाती है। ग्रोथ सेंटर के माध्यम से ब्रांडिंग, लेबलिंग और पैकेजिंग का कार्य जिला उद्योग केंद्र में स्थापित किया गया है, जहां आधुनिक मशीनरी से उत्पादों को बाजार के लायक बनाया जा रहा है।
’36 कला’ ब्रांड का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को शहरी और राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है। राज्य स्तर पर प्रमोशन के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और सरकारी स्टोर्स में विशेष व्यवस्था की जा रही है। इससे न केवल एसएचजी सदस्यों की आय दोगुनी होगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत भी प्रमोट होगी।
सरगुजा जिले में सरसों तेल उत्पादन
सरगुजा जिले के बतौली और लुंड्रा विकासखंडों में सरसों की खेती प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यहां के स्व-सहायता समूहों ने पारंपरिक कोल्हू विधि से तेल निकालना सीखा है, जो रासायनिक प्रक्रिया से मुक्त है। वर्तमान में 15 से अधिक एसएचजी सक्रिय हैं, जो प्रतिमाह 500 लीटर से अधिक तेल उत्पादित कर रही हैं। एनआरएलएम के प्रशिक्षण से इन समूहों को गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी गई है।
ग्रोथ सेंटर में स्थापित आधुनिक सुविधाओं से तेल को 200 मिली, 500 मिली और 1 लीटर की बोतलों में पैक किया जा रहा है। ब्रांड लोगो ’36 कला’ के साथ सरगुजा की प्राकृतिक छवि को दर्शाया गया है। जिला कलेक्टर ने बताया कि प्रारंभिक चरण में 10,000 लीटर तेल ब्रांडेड होगा, जिसकी बिक्री अंबिकापुर के प्रमुख स्टोर्स से शुरू हो चुकी है।
स्व-सहायता समूहों का सशक्तिकरण
एनआरएलएम के तहत सरगुजा में 5000 से अधिक एसएचजी कार्यरत हैं, जिनमें 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। सरसों तेल उत्पादन से जुड़े समूहों को 5 लाख रुपये का ऋण और प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इससे महिलाओं को न केवल रोजगार मिला, बल्कि आत्मनिर्भरता भी प्राप्त हुई। उदाहरणस्वरूप, बतौली की ‘महिला शक्ति समूह’ ने मात्र दो वर्षों में अपनी मासिक आय 20 हजार से बढ़ाकर 1 लाख कर ली।
यह पहल छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ योजना से जुड़ी हुई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्धता से उत्पादकों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है। भविष्य में ऑनलाइन बिक्री और निर्यात की योजना है।
’36 कला’ ब्रांड से सरगुजा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांति आएगी। सरसों तेल की कीमत पारंपरिक बाजार से 20 प्रतिशत अधिक मिल रही है। इससे एसएचजी सदस्यों को प्रति लीटर 50 रुपये अतिरिक्त लाभ हो रहा। जिले में सरसों की खेती का रकबा 30 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है।
सामाजिक स्तर पर महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। कई सदस्य अब बैंक ऋण लेकर उत्पादन बढ़ा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन कम हो रहा है। राज्य सरकार ने 2026 तक 1 लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
Ambikapur: Mustard oil produced by self-help groups under NRLM
उत्पादन में मौसमी उतार-चढ़ाव एक चुनौती है, जिसके लिए कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था की जा रही। गुणवत्ता प्रमाणन के लिए एफपीओ संगठन से सहयोग लिया जा रहा। अगले चरण में ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और जीआई टैग की मांग की जाएगी।
सरगुजा नेचुरल ब्रांड के तहत अन्य उत्पाद जैसे महुआ हनी और चावल भी जोड़े जाएंगे। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से समर्थन प्राप्त हो चुका। यह योजना छत्तीसगढ़ को ग्रामीण उद्यमिता का मॉडल बनाएगी।
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