Surguja Health Center Inspection: 31 officers and employees found absent: सरगुजा:अंबिकापुर। सरगुजा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के उद्देश्य से संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने आकस्मिक निरीक्षण अभियान चलाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरगीडीह एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रघुनाथपुर का दौरा करने पर कई गंभीर खामियां सामने आईं, साथ ही कुल 31 अधिकारी-कर्मचारी अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए। डॉ. शुक्ला ने अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के सख्त निर्देश दिए हैं, जो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही को उजागर करता है।
सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली पहुंचे डॉ. शुक्ला ने लैब का जायजा लिया, जहां अव्यवस्थित स्यूटम स्लाईड मिले और टीबी मरीजों की काउंसलिंग में कमी पाई गई। केंद्र में साफ-सफाई का अभाव स्पष्ट था तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के आईईसी (जनसंपर्क एवं शिक्षा सामग्री) प्रदर्शन की भी कमी थी। यहां 25 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिस पर संयुक्त संचालक ने तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरगीडीह में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, भवन सुधार एवं 102 एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। यहां भी 3 कर्मचारी अनुपस्थित थे। डॉ. शुक्ला ने मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान करने पर जोर दिया। इसी क्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रघुनाथपुर पहुंचे, जहां सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई में सुधार एवं महिला-पुरुष वार्डों का अलगाव सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए। यहां भी 3 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। कुल 31 अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
निरीक्षण से स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। बतौली CHC में लैब की अव्यवस्था और टीबी काउंसलिंग की कमी से मरीजों को उचित इलाज में बाधा पहुंच रही है। साफ-सफाई का अभाव संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा है, जबकि राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना आदि का प्रचार अपर्याप्त है। बरगीडीह PHC में भवन की जर्जर स्थिति और एम्बुलेंस सेवा की अनियमितता गंभीर समस्या है। रघुनाथपुर PHC में वार्ड व्यवस्था की कमी से मरीजों को असुविधा हो रही है। ये खामियां ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी को दर्शाती हैं।
सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में स्वास्थ्य सेवाएं महत्वपूर्ण हैं, जहां सड़क संपर्क कमजोर होने से मरीज जिला अस्पताल तक पहुंचने में कठिनाई महसूस करते हैं। अनुपस्थिति से ओPD, प्रसव कक्ष एवं दवा वितरण प्रभावित हो रहा है। डॉ. शुक्ला ने सभी केंद्राध्यक्षों को निर्देश दिए कि कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें तथा बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का कड़ाई से पालन हो।
डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अनुपस्थित कर्मचारियों को 72 घंटे में कारण बताने का समय दिया गया है, अन्यथा वेतन वसूली एवं विभागीय जांच होगी। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को सभी केंद्रों का साप्ताहिक निरीक्षण करने को कहा। इसके साथ ही स्टॉक रजिस्टर, दवा उपलब्धता एवं मरीज रिकॉर्ड की ऑनलाइन एंट्री समय पर करने पर जोर दिया।
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सरकार की ‘निरंतर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा’ पहल से जुड़ी है। राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग ने 2025 में 100% संस्थागत प्रसव का लक्ष्य रखा है, लेकिन सरगुजा में चुनौतियां बरकरार हैं।
सरगुजा संभाग आदिवासी स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है। मलेरिया, कुपोषण एवं प्रसव संबंधी जटिलताएं आम हैं। बतौली, बरगीडीह एवं रघुनाथपुर जैसे ग्रामीण केंद्रों पर लाखों ग्रामीण निर्भर हैं। 31 कर्मचारियों की अनुपस्थिति से सेवाएं ठप्प होने का खतरा है। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, यह समस्या पुरानी है—मानसून में कर्मचारी अक्सर अनुपस्थित रहते हैं।
मरीजों ने शिकायत की कि दवाएं समय पर नहीं मिलतीं। एक ग्रामीण ने बताया, “डॉक्टर न होने से हम जिला अस्पताल जाते हैं, लेकिन एम्बुलेंस नहीं आती।” यह घटना अन्य जिलों में भी देखी गई, जैसे आगरा जिला अस्पताल में 23 में से केवल 6 डॉक्टर उपस्थित थे।
बायोमेट्रिक सिस्टम के बावजूद अनुपस्थिति जारी है क्योंकि निगरानी कमजोर है। पूर्व सीएमएचओ डॉ. पी.एस. मार्को ने सुझाव दिया कि ‘माई ग्राम स्वास्थ्य’ ऐप से मरीज फीडबैक लें। इसके अलावा, आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर प्रारंभिक जांच बढ़ाएं। सरकार ने 2026 बजट में ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए 20% वृद्धि की है, जिसका उपयोग उपकरण एवं स्टाफ भर्ती में हो।
Surguja Health Center Inspection: 31 officers and employees found absent
यह निरीक्षण सरगुजा स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का संकेत है। डॉ. शुक्ला के सख्त रुख से कर्मचारी सतर्क होंगे। हालांकि, स्थायी समाधान के लिए भर्ती, प्रशिक्षण एवं इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। जिला प्रशासन ने जांच समिति गठित की है, जिसकी रिपोर्ट एक सप्ताह में आएगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सेवाएं बेहतर होंगी, क्योंकि स्वास्थ्य ही विकास का आधार है।
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