National Highway-43: Substandard quality of BT patch repair work in Ambikapur: सरगुजा:अंबिकापुर। राष्ट्रीय राजमार्ग‑43 के अंबिकापुर शहरी क्षेत्र में कराए गए बी.टी. पैच रिपेयर कार्य की गुणवत्ता को लेकर लोक निर्माण विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में पैच रिपेयर किए गए हिस्से की परत आसानी से उखड़ती दिखाई दी, जिसके बाद विभागीय स्तर पर इस पूरे कार्य की जांच शुरू की गई। वीडियो सामने आने के बाद न केवल आम नागरिकों में नाराजगी दिखी, बल्कि सड़क निर्माण व रखरखाव पर खर्च होने वाले सरकारी धन के दुरुपयोग पर भी सवाल खड़े हुए।
वीडियो 20 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग‑43 के अंबिकापुर शहर से गुजरने वाले हिस्से पर किए गए बी.टी. पैच रिपेयर कार्य की स्थिति साफ नजर आ रही थी। पैच लगाए जाने के कुछ ही समय बाद ऊपरी परत टूटकर बिखरती दिखी, जिससे यह आशंका मजबूत हुई कि या तो काम के दौरान मानक तकनीकी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया या फिर घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया। वीडियो में राहगीरों और स्थानीय लोगों की आवाज भी सुनाई दी, जो सड़क की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
वीडियो के वायरल होते ही लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया और प्रारंभिक स्तर पर जानकारी जुटाना शुरू किया। विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों ने संबंधित निर्माण एजेंसी, साइट इंजीनियर और पर्यवेक्षण कर रहे कर्मचारियों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। इसके साथ ही, मौके पर तकनीकी टीम भेजकर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि पैच रिपेयर के दौरान बिटुमेन की मात्रा, तापमान, कम्पेक्शन और बेस लेयर की सफाई जैसे मानकों का पालन वास्तव में किया गया था या नहीं।
जांच की औपचारिक प्रक्रिया अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के माध्यम से शुरू की गई। अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण करके पूरे पैच रिपेयर क्षेत्र का तकनीकी मूल्यांकन किया और विभिन्न जगहों से सैंपल एवं फोटोग्राफ लिए। उसके बाद अधीक्षण अभियंता ने विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर 22 दिसंबर 2025 को पत्र क्रमांक 1643/कार्य/2025‑26 के जरिए मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को भेजा। इस प्रतिवेदन के साथ निरीक्षण के दौरान खींचे गए फोटोग्राफ्स भी संलग्न किए गए, जिनमें पैच की परत उखड़ती हुई और गड्ढों जैसा रूप लेती सड़क स्पष्ट दिख रही थी।
प्रतिवेदन में बी.टी. पैच रिपेयर कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्थानों पर बिटुमिनस मिक्स की मोटाई निर्धारित मानक से कम पाई गई, वहीं कुछ हिस्सों में कम्पेक्शन पर्याप्त स्तर तक नहीं होने से परत ढीली रह गई। यह भी उल्लेख किया गया कि पैच लगाने से पहले पुराने गड्ढों और क्रैक वाले हिस्सों की सही तरह से कटिंग और सफाई नहीं की गई थी, जिससे नया लेयर बेस से अच्छी तरह बॉन्ड नहीं हो पाया। मौके पर कुछ जगहों पर पानी की नमी भी देखी गई, जो बिटुमिनस कार्य की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती है।
अधीक्षण अभियंता ने अपने प्रतिवेदन में यह सुझाव दिया कि कार्य की गुणवत्ता को देखते हुए संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस प्रकार की लापरवाही से न केवल सड़क शीघ्र खराब हो जाती है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है और सरकारी धन का भारी नुकसान होता है। मुख्य अभियंता स्तर पर प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद फाइल को आगे विभागीय सचिवालय तक भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि उच्च स्तर पर कार्रवाई को मंजूरी मिल सके।
लोक निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर जिन अधिकारियों और ठेकेदार पर सवाल उठे हैं, उनसे कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब मांगा जा सकता है। अगर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला, तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध पेनल्टी, आगामी कार्यों से ब्लैकलिस्टिंग और अनुबंध समाप्त करने जैसी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। विभागीय कर्मचारियों के संदर्भ में चेतावनी, वेतनवृद्धि रोके जाने से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है, क्योंकि पर्यवेक्षण में चूक सीधे तौर पर जिम्मेदार मानी जाती है।
इस घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग‑43 के अंबिकापुर शहरी हिस्से के पूरे स्ट्रेच की दोबारा जाँच कराने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि कहीं और भी इसी तरह की खराब गुणवत्ता का काम तो नहीं हुआ है, इसे परखा जा सके। तकनीकी टीम को निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे कोर‑कट टेस्ट, मोटाई की माप और सतह की समतलता जैसे मानकों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। अगर अन्य हिस्सों में भी खामी पाई जाती है तो ठेकेदार से अपने खर्च पर पूरा कार्य दोबारा करवाने की शर्त रखी जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने विभाग की इस सख्त पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया के जरिए सामने आए इस मामले ने सड़क निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। लोगों का मानना है कि अगर हर शिकायत पर इस तरह की त्वरित और निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई दिखे, तो ठेकेदारों और अधिकारियों में भी जवाबदेही की भावना विकसित होगी। नागरिकों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में सड़क निर्माण या पैच रिपेयर जैसे कार्यों की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर डाली जाए और गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट भी आम लोगों के लिए सुलभ हो।
बी.टी. पैच रिपेयर जैसे कार्य अक्सर बरसात या उसके तुरंत बाद जल्दबाजी में किए जाते हैं, जिससे तकनीकी मानकों की अनदेखी हो जाती है। ऐसे में विभाग को मौसम, ट्रैफिक लोड और सड़क की वास्तविक स्थिति को देखते हुए ही रिपेयर कार्य की योजना बनानी चाहिए। साथ ही, साइट पर स्वतंत्र गुणवत्ता नियंत्रण इंजीनियर की तैनाती, काम के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग और ड्रोन से निरीक्षण जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं अपनाकर पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है।
National Highway-43: Substandard quality of BT patch repair work in Ambikapur
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय राजमार्ग‑43 के अंबिकापुर शहरी हिस्से में बी.टी. पैच रिपेयर कार्य की घटिया गुणवत्ता का मामला अब विभागीय कार्रवाई के चरण में पहुंच चुका है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो से शुरू हुई यह पूरी प्रक्रिया अब ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। यदि प्रतिवेदन के आधार पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है और दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो यह न केवल अंबिकापुर बल्कि पूरे प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों के लिए एक सख्त संदेश होगा कि मानक से समझौता अब महंगा पड़ेगा।
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