सूरजपुर: हंस वाहिनी विद्या मंदिर में बच्चे को टी-शर्ट के सहारे पेड़ पर लटकाने का वीडियो वायरल : Surajpur: Video of a child hanging from a tree with the help of a T-shirt in Hans Vahini Vidya Mandir goes viral

Uday Diwakar
5 Min Read

Surajpur: Video of a child hanging from a tree with the help of a T-shirt in Hans Vahini Vidya Mandir goes viral: सूरजपुर :छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक संवेदनशील और आश्चर्यचकित कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें हंस वाहिनी विद्या मंदिर, नारायणपुर के एक बच्चे को शिक्षिकाओं द्वारा अमानवीय सजा दी गई। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि बच्चे को एक पेड़ पर टी-शर्ट के सहारे ही लटका दिया गया है। इस अमानवीय आचरण ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के प्रति शिक्षक-शिक्षिकाओं के व्यवहार पर सवाल खड़ा कर दिया है।

घटना हंस वाहिनी विद्या मंदिर, नारायणपुर, आमापारा की है, जहां एक छोटे बच्चे को शिक्षिकाओं ने सजा के रूप में पेड़ पर टी-शर्ट के सहारे लटका दिया। वीडियो में बच्चे की बेबसी और डर साफ झलकता है। बच्चे ने लगातार रोते हुए बार-बार मदद की गुहार लगाई। परंतु उस समय मौजूद शिक्षिकाएं न तो बच्चे की मदद करने आईं और न ही किसी ने उसकी दुर्दशा रोकने का प्रयास किया। बल्कि, उस दृश्य को मोबाईल फोन से रिकॉर्ड किया गया और रिकॉर्डिंग करने पर शिक्षिकाएं अन्य लोगों को मना करती दिखीं। यह स्थिति दर्शाती है कि इस अमानवीय सजा का आते रहते वीडियो रिकॉर्ड करना और वायरल करना भी उनसे छिपा नहीं था।

यह घटना शिक्षकों के उन दायित्वों के ठीक उलट है, जिनकी अपेक्षा स्कूल से की जाती है। बच्चों के प्रति प्यार, करुणा, सुरक्षा और सम्मान देना शिक्षा का मूल आधार है। लेकिन इस घटना ने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या विद्यालयों में बच्चों के अधिकारों का सम्मान हो रहा है या नहीं। शैक्षिक संस्थान बच्चों के विकास के लिए जगह होती है, जहां भावनात्मक और मानसिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी कि शैक्षणिक शिक्षा।

ऐसे मामलों के लिए स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग को तत्काल संज्ञान लेना आवश्यक है। बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत बच्चों के साथ इस तरह के अमानवीय व्यवहार को गंभीर अपराध माना जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता, बाल अधिकार विशेषज्ञ और मानवाधिकार संगठन इस मामले की कड़ी निंदा कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur

सूरजपुर के लोगों की जम्मो-प्रदेश स्तर पर इस वीडियो ने गहरी चिंता और आक्रोश पैदा किया है। सोशल मीडिया पर इस घटना के खिलाफ भारी विरोध और निंदा व्यक्त की जा रही है। वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग को जांच करने का आदेश दिया है। वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर जाकर जांच प्रक्रिया में शामिल हुए हैं।

पिछले कुछ दिनों में इस प्रकार के बच्चों के प्रति अमानवीय व्यवहार के मामले बढ़े हैं, जो समाज में शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय हैं। शिक्षकों की इस व्यवहार ने शिक्षा के उद्देश्यों को धुंधला कर दिया है, जहां बच्चों को प्रोत्साहित करने की बजाय उन्हें दंडित करना प्राथमिकता बन गया है।

इस मामले से स्पष्ट होता है कि बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता है। शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी नियमित प्रशिक्षण और साइकोलॉजिकल वेलनेस वर्कशॉप आयोजित करें, ताकि वे बच्चों के साथ सही व्यवहार कर सकें। बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और शिक्षा को सर्वोपरि रखने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र की स्थापना आवश्यक है।

इसके अलावा, यह भी आवश्यक है कि बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग किया जाए। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छात्र सुरक्षा समितियां और बच्चों की शिकायत सुनने के मैकेनिज्म प्रभावी बनाए जाएं। साथ ही, अभिभावकों को भी जानकारी दी जानी चाहिए कि उनके बच्चों के साथ किसी भी तरह का गलत व्यवहार हो तो वे किस प्रकार शिकायत कर सकते हैं।

सूरजपुर की यह घटना शिक्षा के उद्देश्य और बच्चों के प्रति जिम्मेदारी की गंभीर विफलता को दर्शाती है। बच्चे समाज का भविष्य होते हैं और उनका सम्मान, सुरक्षा और समुचित देखभाल हर स्थिति में प्राथमिक होनी चाहिए। इस प्रकार की अमानवीयता पर अंकुश लगाने और दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए समाज, प्रशासन और शिक्षा विभाग को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

यह भी पढ़ें- सरगुजा में धर्मांतरण की कोशिश नाकाम, दरिमा पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

Share This Article
Leave a Comment