अंबिकापुर में जनजातीय गौरव दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी शामिल, मुख्यमंत्री करेंगे नई योजनाओं की शुरुआत : President Draupadi Murmu will attend the Tribal Pride Day in Ambikapur

Uday Diwakar
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President Draupadi Murmu will attend the Tribal Pride Day in Ambikapur: सरगुजा:​​​अंबिकापुर।​भगवान बिरसा मुंडा की जयंती एवं जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ की धरती एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रही है। प्रदेश के अम्बिकापुर स्थित पीजी कॉलेज मैदान में आज राज्य स्तरीय भव्य जनजातीय गौरव दिवस समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह अवसर न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह जनजातीय समाज की समृद्ध परंपरा, वीरता और योगदान को सम्मान देने का अभूतपूर्व मंच भी बनने जा रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वह स्वयं देश की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। उनके आगमन से यह आयोजन और अधिक ऐतिहासिक बन गया है। राज्य सरकार द्वारा इस कार्यक्रम की तैयारियां बीते कई दिनों से जोरों पर थीं। पूरे अंबिकापुर शहर को जनजातीय गौरव और संस्कृति के रंगों में रंग दिया गया है।

राष्ट्रपति का कार्यक्रम और समय-सारिणी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह 11ः20 बजे वायुसेना के विशेष विमान से अंबिकापुर हवाई पट्टी पर पहुंचेंगी। इसके बाद वह सीधे पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह स्थल पर जाएंगी। कार्यक्रम में उनका समय 12ः52 तक निर्धारित है, जिसके पश्चात वे 12ः53 बजे अंबिकापुर से प्रस्थान करेंगी। इस बीच राष्ट्रपति कार्यक्रम में उपस्थित जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों से मुलाकात करेंगी तथा उन्हें सम्मानित करेंगी।

राष्ट्रपति के स्वागत के लिए मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहेंगे। अंबिकापुर के आसपास के सभी जिलों से जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों को विशेष आमंत्रण दिया गया है।

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जनजातीय गौरव दिवस का उद्देश्य

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को पूरे भारत में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान बिरसा मुंडा ने देश की आजादी के पहले ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जल, जंगल, जमीन की लड़ाई में जनजातीय समुदाय को संगठित किया था। उन्हें ‘धरती आबा’ यानी धरती पिता के रूप में जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चला मुंडा आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय रहा है।

छत्तीसगढ़, जो भारत में सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाले राज्यों में से एक है, हमेशा से जनजातीय परंपरा, संस्कृति और गौरव का केंद्र रहा है। राज्य सरकार ने बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर इस बार का उत्सव अंबिकापुर में आयोजित करने का निर्णय लिया, ताकि सरगुजा क्षेत्र की जनजातीय विविधता को पूरे देश के सामने प्रस्तुत किया जा सके।

राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा कई नई जनकल्याणकारी योजनाओं का शुभारंभ किया जाएगा। इनमें प्रमुख हैं – ‘अकरा योजना’, ‘बैगा सम्मान योजना’, ‘गुनिया सम्मान योजना’ और ‘हड़जोड़ सम्मान योजना’। इन योजनाओं का उद्देश्य पारंपरिक जनजातीय ज्ञान, संस्कृति और समाज के पुरोधाओं को संरक्षण देना है।

‘अकरा योजना’ के तहत सरकार जनजातीय युवाओं को कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी। वहीं ‘बैगा सम्मान योजना’ के माध्यम से बैगा जनजाति के पारंपरिक वैद्य और लोक चिकित्सकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। ‘गुनिया और हड़जोड़ सम्मान योजना’ का लक्ष्य उन पारंपरिक जनजातीय व्यक्तियों को मान्यता और सहयोग प्रदान करना है, जिनका योगदान समाज को चिकित्सा, संस्कृति और लोक परंपरा के क्षेत्र में रहा है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री राज्य सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी देंगे।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों राज्य में विभिन्न जनजातीय विद्रोहों और स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले वीर नायकों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें सोनाखन के वीर नरायण सिंह, भाना देव, गोजा नाईक, टंकू लखना और सरगुजा, बस्तर क्षेत्रों के अन्य सेनानियों के वंशज शामिल होंगे।

यह सम्मान समारोह न केवल जनजातीय नायकों की स्मृति को जीवित रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा भी देगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह आयोजन आदिवासी समाज को आत्मसम्मान, पहचान और विकास की दिशा में नई शक्ति देगा।

संस्कृति, लोककला और परंपरा की झलक

अंबिकापुर का पीजी कॉलेज मैदान आज जनजातीय परंपराओं और संस्कृति से सजा हुआ है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में अपनी संस्कृति और नृत्य प्रस्तुत करेंगे। गोंडी, बैगा, कमार, मुरिया, हल्बा और उरांव जनजातियों के नृत्य-दल कार्यक्रम का आकर्षण रहेंगे।

स्थल पर बनाए गए प्रदर्शनी परिसर में जनजातीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन, वन उत्पाद और गृह निर्मिति कला की झलक देखने को मिलेगी। राज्य लघु वनोपज संघ, वन विभाग तथा पर्यटन मंडल द्वारा संयुक्त रूप से ‘जनजातीय गौरव प्रदर्शनी’ लगाई गई है, जिसमें आदिवासी जीवनशैली को सजीव रूप में दर्शाया गया है।

राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए अंबिकापुर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। लगभग 1000 से अधिक पुलिस जवान, विशेष सुरक्षा दल और खुफिया एजेंसियां तैनात की गई हैं। कार्यक्रम स्थल और शहर के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा जाल बिछाया गया है।

स्थानीय प्रशासन ने वाहनों के लिए डाइवर्जन प्लान जारी किया है ताकि आम जनों को असुविधा न हो। साथ ही, मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाओं को भी सतर्क रखा गया है।

जनजातीय गौरव दिवस को लेकर छत्तीसगढ़ भर में उत्साह का वातावरण है। अंबिकापुर, कोरिया, जशपुर और बलरामपुर जैसे उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों से हजारों लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। शहर के स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्थाएं और जनजातीय संगठन पूरे समारोह में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

शहरभर में भगवान बिरसा मुंडा की झांकियां, जनजागरूकता रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। मुख्य मार्गों पर झंडे, पोस्टर और स्वागत द्वार सजाए गए हैं जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय विरासत का परिचय दे रहे हैं।

संभावना है कि राष्ट्रपति मुर्मू आज अपने संबोधन में देश के आदिवासी समाज की भूमिका और छत्तीसगढ़ के योगदान पर विशेष रूप से प्रकाश डालेंगी। वे महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा और जनजातीय क्षेत्रों में विकास के प्रति केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख भी करेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह संबोधन छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास और पहचान की दिशा में नई प्रेरणा देगा।

अंबिकापुर का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय अस्तित्व, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। यह वह भूमि है जो सदियों से जन-आंदोलनों, पर्यावरण संरक्षण और लोक संस्कृति की धारा को समेटे हुए है। राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देगी।

President Draupadi Murmu will attend the Tribal Pride Day in Ambikapur

राज्य सरकार का कहना है कि हर साल जनजातीय गौरव दिवस को अलग-अलग जिलों में आयोजित करके स्थानीय परंपराओं और नायकों को नए सिरे से सामने लाने का लक्ष्य रखा गया है।

20 नवंबर का यह दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। अंबिकापुर में जनजातीय गौरव दिवस न केवल भगवान बिरसा मुंडा की स्मृति को नमन करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि जल, जंगल और जमीन की आत्मा के बिना छत्तीसगढ़ की पहचान अधूरी है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में यह आयोजन राज्य के जनजातीय स्वाभिमान और विकास की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होगा।

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