Ambikapur Advocate couple attacked at midnight: सरगुजा:अंबिकापुर। रात लगभग 11 बजे, अंबिकापुर के पटेलपारा उरांव कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में अधिवक्ता राजेश तिवारी और उनके परिवार पर कुछ व्यक्तियों ने हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब राजेश तिवारी का पुत्र राहुल तिवारी अपनी कार को पोर्च में खड़ा करने के लिए पटेलपारा तिराहे से घर की ओर लौट रहा था। इसी दौरान पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल संतोष कश्यप और उनके साथियों ने राहुल तिवारी की कार के आगे अपनी गाड़ी रोक दी और बिना इंडिकेटर दिए गाड़ी मोड़ने को लेकर विवाद शुरू कर दिया।
विवाद के दौरान हेड कॉन्स्टेबल और उनके साथियों ने राहुल तिवारी के साथ मारपीट शुरू कर दी। राहुल ने फोन पर अपने पिता को इस घटना की जानकारी दी। जब राजेश तिवारी और उनकी पत्नी संध्या तिवारी मौके पर पहुंचे तो हेड कॉन्स्टेबल और उनके साथी बच्चों के साथ मिलकर मारपीट करने लगे। इसके बाद राजेश तिवारी के साथ भी मारपीट की गई, जिसमें उनका बायाँ पैर फ्रैक्चर हो गया। उनकी पत्नी संध्या तिवारी भी गंभीर रूप से घायल हुईं।
इस मामले में पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल की संलिप्तता बताई जा रही है। हेड कांस्टेबल संतोष कश्यप ने वर्दी के रौब का इस्तेमाल करते हुए धक्का-मुक्की और अभद्रता की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने हेड कांस्टेबल को पहले लाइन अटैच किया फिर निलंबित कर दिया। घटना की जांच गांधीनगर पुलिस द्वारा की जा रही है, और मामले में प्रधान आरक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
अंबिकापुर जैसे शहर में सार्वजनिक सुरक्षा के नाम पर अपनी मजबूरी का दुरुपयोग करने वाले पुलिसकर्मियों की यह शर्मनाक हरकत स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश का कारण बनी। ब्राह्मण समाज समेत विभिन्न सामाजिक समूहों ने इस घटना की निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासनिक पदाधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
Ambikapur Advocate couple attacked at midnight
मारपीट और घायल होने के बाद राजेश तिवारी व संध्या तिवारी का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। उनके परिवार में गहरा सदमा और स्थानीय जनमानस में भय व्याप्त है कि इस तरह की घटनाएँ अनियंत्रित न हों। अधिवक्ताओं ने इस घटना को न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन की निर्भीक भूमिका के लिए चुनौती बताते हुए पूरे मामले की सघन जांच की मांग की है।
अंबिकापुर में अधिवक्ता राजेश तिवारी और उनके परिवार पर हुआ यह हमला न केवल एक व्यक्तिगत आघात है, बल्कि यह कानून और व्यवस्था की हालत पर प्रश्नचिन्ह भी लगाता है। पुलिस के एक हिस्से की इस तरह की दादागीरी और सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासनिक सतर्कता जरूरी हो गई है। पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा दोनों उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिससे ऐसा मनोबल गिराने वाला हिंसक प्रवृत्ति समाप्त हो सके और जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
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