राज्य स्थापना दिवस पर ‘आरपा पैरी के धार’ को अनिवार्य रूप से बजाने की मांग, NSUI ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन : NSUI submits memorandum to Chief Minister demanding compulsory playing of ‘Arpa Pairi Ke Dhar’ on State Foundation Day

Uday Diwakar
7 Min Read

NSUI submits memorandum to Chief Minister demanding compulsory playing of ‘Arpa Pairi Ke Dhar’ on State Foundation Day : रायपुर : राज्य स्थापना दिवस के मौके पर ‘आरपा पैरी के धार’ को अनिवार्य रूप से बजाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने आज रायपुर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। इस मांग के पीछे संगठन की राय है कि राज्य गीत केवल एक गीत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा और अस्मिता का प्रतीक है, जिससे प्रदेश की संस्कृति, इतिहास और जीवन मूल्यों की झलक मिलती है। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति और सार्वजनिक हित में व्यापक चर्चा शुरू कर दी है, जिसमें संस्कृति, पहचान और आगामी पीढ़ियों की भागीदारी जैसे पहलुओं को विस्तार से उठाया गया है।

NSUI के प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस से पूर्व रायपुर कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार से यह मांग की गई कि ‘आरपा पैरी के धार’ गीत को हर सरकारी कार्यक्रम, स्कूल, सार्वजनिक स्थल और रेलवे स्टेशन पर अनिवार्य रूप से बजाया जाए। संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने त्वरित कार्रवाई नहीं की तो वे स्वयं रायपुर रेलवे स्टेशन पर राज्य गीत बजाएंगे और इसे जन-अभियान के रूप में चलाएंगे।

राज्य गीत ‘आरपा पैरी के धार’ छत्तीसगढ़ी भाषा में आकर्षक एवं भावनात्मक रूप से रचा गया है। इस गीत की रचना नरेंद्र देव वर्मा ने की थी, जो छत्तीसगढ़ की साहित्यिक, सांस्कृतिक विरासत के अग्रणी लेखक माने जाते हैं। गीत में प्रदेश की नदियों, मिट्टी, संस्कृति और परंपराओं का उल्लेख मिलता है, जिससे जनता को अपनी जड़ों से जोड़ने की प्रेरणा मिलती है। सरकारी स्तर पर इस गीत को प्रदेश का राज्यगीत घोषित करने के बाद इसे स्कूलों के प्रार्थना सभा और सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में शामिल किया गया था।

छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों और शैक्षणिक संस्थानों में कई सार्वजनिक आयोजनों की शुरुआत राज्यगीत से की जाती है, जिससे सांस्कृतिक गौरव को स्थापित करने का संदेश मिलता है। NSUI का तर्क है कि प्रत्येक सार्वजनिक स्थल और सरकारी कार्यक्रम में राज्यगीत अवश्य बजना चाहिए, जिससे न केवल समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो, बल्कि युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur

ज्ञापन के बाद चर्चा यह चल रही है कि प्रशासन और प्रदेश सरकार इस मांग पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे। मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को यह ज्ञापन प्राप्त हुआ है, लेकिन अब तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इससे पूर्व कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के सभी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान और सरकारी आयोजनों की शुरुआत में राज्यगीत को शामिल करने के निर्देश जारी किए थे। वर्तमान में NSUI की पहल ने इस विषय को नए सिरे से चर्चा में ला दिया है।

वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ अपना 25वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां मंत्री, सांसद और विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम का थीम ‘नए छत्तीसगढ़ के 25 साल की समृद्धि’ रखा गया है। इस सिल्वर जुबली समारोह पर NSUI की यह मांग और जोर पकड़ती नजर आ रही है कि राज्यगीत को हर समारोह में विशिष्ट स्थान मिलना चाहिए।

‘आरपा पैरी के धार’ और युवा पीढ़ी की जुड़ाव

NSUI के महामंत्री हेमंत पाल ने अपने संबोधन में कहा कि “यह गीत प्रदेश की आत्मा और पहचान है, जिसे हर सार्वजनिक मंच पर स्थान मिलना चाहिए।” उनके अनुसार, राज्यगीत का अनिवार्य रूप से बजना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ युवा पीढ़ी को जोड़े रखने का सर्वोत्तम तरीका है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने हेतु राज्यगीत को सभी स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों और रेलवे स्टेशनों पर अनिवार्य किया जाए।

राज्य सरकार के पूर्व निर्देशों के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्यगीत से करना जरूरी है, लेकिन इसे हर सार्वजनिक स्थल एवं स्टेशन पर लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अभी विस्तृत मार्गदर्शन नहीं हुआ है। जनसुविधा, तकनीकी एवं लॉजिक व्यवस्था जैसे पहलुओं पर भी चर्चा चल रही है। NSUI की मांग से सरकार पर नीति निर्धारण का दबाव बढ़ गया है।

NSUI submits memorandum to Chief Minister demanding compulsory playing of ‘Arpa Pairi Ke Dhar’ on State Foundation Day

ज्ञापन और प्रदर्शन के बाद कई सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और नागरिक समितियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार पत्रों में इस विषय पर सकारात्मक चर्चा हो रही है। राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की दिशा में यह पहल सराहनीय मानी जा रही है।

image 57

NSUI ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यगीत को हर सरकारी और सार्वजनिक मंच पर अनिवार्य रूप से बजाने की मांग रखते हुए प्रदेश की संस्कृति, पहचान और आत्मा को संजोने का संदेश दिया है। यह मांग प्रशासन और राज्य सरकार के सामने है, जिसे शीघ्र ही नीति निर्धारण के स्तर पर सुनवाई और अमल की आवश्यकता है। गीत ‘आरपा पैरी के धार’ को प्रदेश की आत्मा बताते हुए NSUI ने अपनी मांग को जन-आंदोलन का रूप देने की चेतावनी भी दी है। पूरे राज्य में इस मांग को लेकर जागरूकता अभियान, चर्चा और जन-संबाद का माहौल बन गया है, जिससे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को साझी पहचान और सम्मान मिलता रहेगा।

यह भी पढ़ें:- छत्तीसगढ़ की पहचान बनी अंबिकापुर की पहल, ‘गार्बेज कैफे’ का जिक्र ‘मन की बात’ में

Share This Article
Leave a Comment