भारत में मोटापा: डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ता खतरा : Obesity in India

Uday Diwakar
4 Min Read
  • भारत में मोटापा तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रहा है।
  • फास्ट फूड, शहरीकरण और शारीरिक गतिविधियों की कमी मुख्य कारण।

Obesity in India: भारत में मोटापा अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनकर सामने आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल वजन बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि टाइप-2 डायबिटीज और उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) जैसी खतरनाक बीमारियों का प्रमुख कारण बन गया है। खासकर पेट के आसपास जमा होने वाली विसेरल फैट को डॉक्टर सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।

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Obesity in India तेजी से बढ़ रहे मामले

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्टों के अनुसार, भारत में पिछले दो दशकों में मोटापे के मामलों में कई गुना वृद्धि हुई है। शहरों में फास्ट फूड और सॉफ्ट ड्रिंक का बढ़ता चलन और ग्रामीण इलाकों में भी बदलती जीवनशैली इस समस्या को और गंभीर बना रही है। बच्चों और युवाओं में शारीरिक गतिविधि की कमी के चलते मोटापा महामारी का रूप लेने लगा है।

डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि मोटापा डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण है। पेट की चर्बी इंसुलिन की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और धीरे-धीरे टाइप-2 डायबिटीज की स्थिति बन जाती है।
इसी तरह, अत्यधिक वसा जमा होने से रक्तचाप बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ने पर स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी फेलियर जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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भारत में क्यों बढ़ रहा मोटापा

  • गलत खान-पान और जंक फूड की बढ़ती खपत
  • शारीरिक श्रम और व्यायाम की कमी
  • तनाव और अनियमित नींद
  • शहरीकरण और निष्क्रिय जीवनशैली
  • सामाजिक रूढ़ियां, जिनमें मोटे शरीर को “समृद्धि” का प्रतीक माना जाता है

डॉक्टरों का कहना है कि मोटापे से जुड़ी बीमारियां केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर बोझ डाल रही हैं। अस्पतालों में डायबिटीज और हृदय रोगों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य बजट और परिवारों की आर्थिक स्थिति दोनों पर असर पड़ रहा है।

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बचाव के उपाय

विशेषज्ञों ने मोटापे से बचाव के लिए लोगों को जागरूक होने की अपील की है।

  • संतुलित आहार जिसमें सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल हों।
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि।
  • तनाव और नींद पर नियंत्रण।
  • नियमित ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव काफी नहीं होगा। सरकार और समाज को भी इस चुनौती से निपटने के लिए कदम उठाने होंगे।

  • बच्चों के लिए स्कूलों में खेल-कूद और स्वास्थ्य शिक्षा को अनिवार्य करना।
  • फास्ट फूड और मीठे पेय पदार्थों पर नियंत्रण और टैक्स बढ़ाना।
  • सार्वजनिक स्थानों पर व्यायाम की सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • लोगों को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाना।

भारत में मोटापा तेजी से बढ़ते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। यह डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी व्यापक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

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