Ambikapur Garba-Dandiya Festival Controversial: सरगुजा:छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर में नवरात्र के मौके पर आयोजित गरबा एवं डांडिया महोत्सव इस बार विवादों का कारण बन गया है। इस महोत्सव में बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा के साथ साथ यूट्यूबर एल्विश यादव और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंजली अरोड़ा को बुलाए जाने पर स्थानीय हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये कलाकार सोशल मीडिया पर अश्लीलता फैलाते हैं और ऐसे लोगों का नवरात्र जैसे धार्मिक आयोजन में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
Ambikapur Garba-Dandiya Festival Controversial
यह विवाद इस बात को लेकर शुरू हुआ कि आयोजन समिति द्वारा निजी होटल पर्पल ऑर्किड और सरगवां पैलेस में गरबा-डांडिया महोत्सव के लिए एल्विश यादव और अंजली अरोड़ा को विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया था। आयोजकों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन कलाकारों के कार्यक्रमों का जोरदार प्रचार भी किया। साथ ही महंगे प्रवेश पास बेचे जा रहे हैं और लोगों से सेल्फी व फोटो खिंचवाने के लिए अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जा रहा है। एल्विश यादव को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब सत्रह लाख रुपए, जबकि अंजली अरोड़ा को दस लाख रुपए की फीस दी गई है।
हिंदू संगठनों जैसे सर्व सनातन रक्षा वाहिनी और सर्व हिंदू समाज संगठन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने एल्विश यादव और अंजली अरोड़ा को अश्लीलता फैलाने वाला बताते हुए नवरात्र जैसे पवित्र त्यौहार में उनकी भागीदारी को अनुचित करार दिया है। विरोध स्वरूप उन्होंने उनके पोस्टर जलाए और आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सरगुजा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आयोजन पर रोक लगाने की भी मांग की है।
इस विरोध के मद्देनजर प्रशासन ने अंबिकापुर में सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए हैं और हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने समझाइश भी शुरू कर दी है। अभी इस मामले में आयोजकों और प्रशासन के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि आगे क्या किया जाए। हिंदू संगठनों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ सख्ती जरूरी है ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता बनी रहे।
यह विवाद इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि नवरात्र महोत्सव एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ सामूहिक भक्ति और उत्सव मनाया जाता है। ऐसे आयोजनों में जहां धार्मिक भावनाएं प्रबल होती हैं, वहां अश्लीलता फैलाने वाले कलाकारों की भागीदारी पर रोक लगाने को लेकर सक्त राय बनना स्वाभाविक भी है।
अंबिकापुर गरबा महोत्सव विवाद की यह घटना राज्य में नवरात्र पर्व समारोहों के आयोजन को लेकर चल रहे बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक बहस के बीच आई है, जिसमें धार्मिक आयोजनों में किस प्रकार की प्रतिभागिता होनी चाहिए, इसे लेकर कई मतभेद उठे हैं। इस विवाद ने स्थानीय समाज में गरबा डांडिया जैसे उत्सवों में सहभागिता का मिथक और विवाद दोनों ही उभारे हैं।
इस बीच, आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक और मनोरंजन के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है और किसी धर्म या सामाजिक समुदाय को आहत करने का उनका उद्देश्य नहीं है। उन्होंने एल्विश यादव और अंजली अरोड़ा के कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रचार भी किया है, जिससे यह महोत्सव दर्शकों के लिए आकर्षक बन सके।
हालांकि, आगामी दिनों में प्रशासन की भूमिका अहम होगी कि वह सामाजिक शांति को बनाए रखते हुए आयोजन को किस प्रकार संचालित करता है। वर्तमान में अंबिकापुर में सुरक्षा की दृष्टि से सतर्कता बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और धार्मिक त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में पूरा हो सके।
इस विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेशों में धार्मिक आयोजनों में प्रतिभागिता की सीमाओं को लेकर स्थानीय संगठनों की संवेदनशीलता उच्च स्तर पर है। गरबा डांडिया जैसे उत्सवों में किस कलाकार या प्रतिभागी की अनुमति होनी चाहिए, यह सवाल अब न केवल अंबिकापुर बल्कि पूरे क्षेत्र में बहस का विषय बन गया है।
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