Youth Congress protests against broken roads in Ambikapur places pictures of leaders in potholes: सरगुजा:अंबिकापुर शहर की सड़कों की जर्जर हालत ने स्थानीय जनता और युवा कांग्रेस के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की उपेक्षा के कारण सड़कें इतनी खराब हो गई हैं कि आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है। इस विद्रूप स्थिति के खिलाफ युवा कांग्रेस ने एक बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है, जिसमें धरना प्रदर्शन, सांकेतिक चक्काजाम, और जर्जर सड़कों के गड्ढों में नेताओं की तस्वीरें लगाकर विरोध जताया गया। इस लेख में अंबिकापुर की सड़कों की मौजूदा स्थिति, इसके कारण, युवाओं के प्रदर्शन की बातें, और सड़क सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

Youth Congress protests against broken roads in Ambikapur places pictures of leaders in potholes
अंबिकापुर की अधिकांश सड़कों के हालात बेहद चिंताजनक हैं। शहर की लगभग 70 प्रतिशत सड़कें टूटी-फूटी हैं और गड्ढों से भरी हुई हैं। विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्ग 343 की स्थिति बेहद खराब है। यह हाईवे अंबिकापुर से रामानुजगंज और झारखंड से जुड़ता है, जो क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण आवागमन मार्गों में से एक है। बारिश के मौसम में गड्ढों में पानी भर जाने से सड़कों पर वाहन चलाना खतरनाक हो जाता है, जिससे आम जनता को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है और वाहन भी बार-बार खराब होते रहते हैं।
युवा कांग्रेस का आंदोलन
युवा कांग्रेस अंबिकापुर ब्लॉक ने इस जर्जर सड़कों की समस्या को मुद्दा बनाकर शनिवार को पीजी कॉलेज के सामने धरना प्रदर्शन और सांकेतिक चक्काजाम किया। इस दौरान उन्होंने सड़कों पर बने गड्ढों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल की तस्वीर लगाकर विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने सरकार की उपेक्षा और जिम्मेदारी से बचने के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने सड़कों की मरम्मत के लिए 7 दिन का अल्टीमेटम भी दिया, जिसमें जानकारी दी गई कि यदि मरम्मत के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन में कई कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति रही, जिनमें युवा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष शुभम जायसवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, ब्लॉक कांग्रेस शहर अध्यक्ष हेमंत सिन्हा, तथा ग्रामीण अध्यक्ष विनय शर्मा शामिल थे। प्रदर्शन में नाराज कार्यकर्ताओं ने सरकार की जनता के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया और दावा किया कि डबल इंजन सरकार के वादे सिर्फ भ्रमित करने वाले हैं।
अंबिकापुर की सड़कों की स्थिति खराब होने के कई कारण हैं। सबसे पहले, बरसात का मौसम सड़कों की खराब स्थिति को गंभीर बना देता है। गड्ढे भर जाने के कारण वाहन चालक और पैदल मार्गदर्शक दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग और स्थानीय सड़कों के निर्माण व सुधार के लिए मिले फंड का सही प्रबंधन नहीं हो पाने के कारण भी मरम्मत कार्य में देरी होती है।
वन विभाग की मंजूरी का लंबित होना भी कार्यों में बाधा डालता है। जैसे कि अंबिकापुर-रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग के नवनिर्माण और चौड़ीकरण के लिए वन विभाग को पेड़ कटाई के लिए करोड़ों रुपये दिए गए थे, मगर वन विभाग से अनुमतियां मिलने में समय लगना निर्माण कार्य को बाधित करता है।
हालांकि सड़क की वर्तमान स्थिति निराशाजनक है, छत्तीसगढ़ सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए कई योजनाएं तैयार की गई हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कई राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण और सुधार की घोषणा की है। कटघोरा से अंबिकापुर तक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 130 का फोरलेनिंग काम स्वीकृत हो चुका है, जिससे सड़क की चौड़ाई दोगुनी (लगभग 26 मीटर) हो जाएगी। इस फोरलेनिंग से न केवल सड़क पर वाहनों का दबाव घटेगा, बल्कि दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

अंबिकापुर-रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग का नवनिर्माण तीन चरणों में किया जाएगा, जिसमें वन विभाग से मिली साफ़ मंजूरी के बाद कार्य शीघ्र शुरू होगा। स्थानीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्दी से जल्दी कार्य प्रारंभ करें ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा हो सके।
सड़क चारदीवारी, साईडवाल्क और फ्लाइओवर जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं, जो भविष्य में अंबिकापुर के ट्रैफिक संकट को कम करने में मदद करेंगी।
टूटी-फूटी सड़कों के कारण अंबिकापुर की जनता को रोजमर्रा की जिंदगी में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चे, अस्पताल जाने वाले मरीज, और रोजाना कार्यस्थल आने जाने वाले लोग ट्रैफिक जाम, दुर्घटना और वाहन खराब होने जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं। आम लोगों को बाजार, बैंक, और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं, जिनमें कई बार गंभीर चोटें और जान-माल की हानि होती है। वाहन मालिकों के लिए भी मरम्मत और रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है क्योंकि खराब सड़कें उनके वाहनों को हानि पहुंचाती हैं।
हालांकि कुछ अधिकारी सड़क मरम्मत के लिए फंड की बात करते हैं, कई बार फंड की कमी या प्राथमिकता के अभाव के कारण सड़क कार्य ठप रह जाते हैं। जनता अब सुधार की मांग जोर-शोर से कर रही है और युवा कांग्रेस जैसी संगठन इसे जनहित की लड़ाई के रूप में ले रही है।
राज्य और केंद्र सरकार से जनता की मुख्य अपेक्षा है कि वे जर्जर सड़कों की समस्या का स्थायी समाधान करें। तत्काल मरम्मत कार्य के साथ-साथ लंबी अवधि के बेहतर सड़क नेटवर्क, चौड़ी और सुरक्षित सड़कों और बेहतर रखरखाव व्यवस्था लागू करनी होगी।
युवा कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सक्रिय रूप से आंदोलन शुरू कर दिया है जिससे सरकार पर जनता की आवाज दबाव में आई है। अगर सरकार सही समय पर कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन का स्वर और भी तेज हो सकता है। यह आंदोलन जनता की आवाज बनने में मदद करेगा और सड़क विकास के कार्यों को गति देगा।
सड़कें न केवल अंबिकापुर के यातायात के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, और सामाजिक समरसता के लिए भी आधार हैं। इसलिए सड़कों की सुध के लिए सभी पक्षों का साझा प्रयास आवश्यक है।
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