कोरबा छात्रावास मरम्मत घोटाला: रसूखदार अफसर बरी, ठेकेदारों पर शिकंजा : Korba hostel renovation scam

Uday Diwakar
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Korba hostel renovation scam: कोरबा: विकास विभाग में छात्रावास मरम्मत घोटाले में रसूखदार अफसर बड़ी आसानी से बच निकल रहे हैं, जबकि केवल कुछ ठेकेदारों और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। आदिवासी विकास विभाग इस मामले में अपने एक डाटा एंट्री ऑपरेटर और चार ठेकेदारों को दोषी मान रहा है।

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Korba hostel renovation scam

घोटाले में आदिवासी विभाग के तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर, विभाग के सहायक अभियंता अजीत कुमार तिग्गा, और लोक निर्माण विभाग के सब इंजीनियर राकेश वर्मा की भूमिका स्पष्ट नहीं हो पाई है। विभाग इन अफसरों के खिलाफ केवल विभागीय जांच के आदेश दे रहा है, जबकि जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने ठेकेदारों और डाटा एंट्री ऑपरेटर की मिलीभगत को स्वीकार किया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कई कार्य बिना काम किए पूरा दिखा दिए गए और लगभग 80 लाख रुपये फर्जी बिलिंग के जरिए खर्च किए गए। 48 लाख रुपए के चार कार्य आज तक शुरू नहीं किए गए हैं। इसके साथ ही कार्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी गायब हो गए हैं।

2019-22 के वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार से 6 करोड़ रुपये की राशि मिली थी, जिसमें से करीब 3.83 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े की शिकायत पत्रकार और RTI कार्यकर्ता ने की थी। इसके बाद कलेक्टर ने गंभीरता से जांच के आदेश दिए। हालांकि, कार्रवाई अब तक रसूखदार अफसरों तक नहीं पहुंच पाई है।

पुलिस ने चार फर्मों और डाटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज की है, लेकिन गिरफ्तारी और फर्मों के खिलाफ ठोस कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। विभागीय अफसरों के आरोपों को लेकर विभाग में असमंजस बना हुआ है, और पूरे मामले में प्रशासन की नाकामी भी सामने आ रही है।

यह भारी भ्रष्टाचार स्थानीय प्रशासन और विभागीय क्रियाकलापों में गंभीर सवाल खड़े करता है। जनता इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद कर रही है ताकि विकास कार्यों में पारदर्शिता लाई जा सके और भ्रष्टाचार रुका जा सके।

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