NHM employees announce water protest: रायपुर : प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के लगभग 16 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मी 18 अगस्त से बेमियादी हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल अब 20 दिन पूरे कर चुकी है और स्वास्थ्य कर्मचारियों के आंदोलन ने सरकार की नींद उड़ा दी है। वे अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर कड़ा आंदोलन कर रहे हैं और अब नवा रायपुर में जल सत्याग्रह की घोषणा भी कर चुके हैं। यह आंदोलन स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की स्थिति और कर्मचारियों के भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है।
संविदा कर्मचारियों की मांगें
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की 10 प्रमुख मांगें हैं जिनका वे लंबे समय से समाधान चाहते आ रहे हैं। सबसे पहली मांग है नियमितीकरण, यानी संविदा कर्मियों को स्थायी कर्मचारी बनाया जाए। इसके अलावा वे ग्रेड पे की मांग कर रहे हैं, जो उनके वेतन और पदोन्नति में पारदर्शिता लाएगा। कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल इंस्योरेन्स, वेतन वृद्धि, मेडिकल लीव पर समय पर भुगतान, स्थानांतरण नीति, और कार्य की सुरक्षा जैसी अपेक्षाएं हैं। वे चाहते हैं कि अन्य नियमित कर्मचारियों के समान उनके वेतन, भत्ते और सुविधाएं हों।
छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के नेता हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा, “हम अपनी मांगों को लेकर पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। 160 बार ज्ञापन देने के बाद भी शासन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। हमने कई बार प्रदर्शन किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। बर्खास्तगी और दमनकारी कार्रवाई से हमें दबाने का प्रयास किया गया है, लेकिन हमारी आवाज दबाने में सरकार नाकाम रही।”
NHM employees announce water protest हड़ताल की शुरूआत
18 अगस्त 2025 से शुरू हुई यह अनिश्चितकालीन हड़ताल 20 दिन से ज्यादा चल रही है। हड़ताल के दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मी लगातार सक्रिय थे और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हड़ताल शुरू होने से पहले 13 अगस्त को सरकार द्वारा कार्यकारिणी समिति की बैठक में 10 में से पांच मांगों पर सहमति जताई गई, लेकिन बाकी मांगों पर विवाद जारी रहा। इन बाकी मांगों में सबसे महत्वपूर्ण नियमितीकरण था।
तालाबंदी के बावजूद कई स्वास्थ्य कर्मी अपने काम पर नहीं लौटे। इसी कारण सरकार ने 25 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णायक कदम उठाया। कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी, जिससे तनाव की स्थिति बढ़ गई। इस कदम के बाद संविदा कर्मियों का आंदोलन और ज्यादा तेज हो गया है।
जल सत्याग्रह की योजना
हड़ताल के 20 दिनों बाद संविदा कर्मचारियों ने अब आंदोलन की नई कड़ी में जल सत्याग्रह की घोषणा की है, जो नवा रायपुर में किया जाएगा। यह सत्याग्रह उनकी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक कठोर तरीका है। इस आंदोलन में अधिक से अधिक कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है।
जल सत्याग्रह के द्वारा संविदा कर्मचारियों का मकसद न केवल अपनी मांगों को मजबूती देना है, बल्कि जनता और सरकार दोनों को यह संदेश देना भी है कि बिना उचित न्याय के वे संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।
संविदा कर्मचारियों की इस लंबी हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी बुरा असर पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल, गैर-संचारी रोगों की जांच, और प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं बाधित हुई हैं। कई स्वास्थ्य केंद्र बंद हैं या कामकाज सीमित है। नियमित कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया, “हड़ताल के चलते काम में कमी आई है। मुझे तीन लोगों का काम अकेले करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।”
सरकार ने हड़ताल के दौरान कई बार संवाद की पहल की है और कुछ मांगों पर सहमति भी जताई है। राज्य एनएचएम मिशन की निदेशक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि 13 अगस्त की बैठक में 10 में से पांच मांगों को मंजूरी मिली और बाकी पर विचार जारी है। प्रमुख मांगों में वेतन वृद्घि, कैशलेस मेडिकल बीमा, और आपातकालीन भुगतान शामिल हैं। लेकिन नियमितीकरण और अन्य बड़े मुद्दों पर उच्च स्तर पर निर्णय होना बाकी है।
सरकार ने हड़ताल को लेकर ‘नो वर्क नो पे’ नीति बनाई है और बर्खास्तगी का भी फैसला किया है, जिससे आंदोलन और तेज हो गया है। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों ने कहा है कि हड़ताल का स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन वे सरकार और कर्मचारी संघ के बीच संवाद की उम्मीद भी जताते हैं।
संविदा स्वास्थ्य कर्मी अपनी मांगों के प्रति अडिग हैं और संघर्ष जारी रखने की तैयारी में हैं। वे कहते हैं कि केवल अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया जा रहा है, और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपने आंदोलन को खत्म नहीं करेंगे।
छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा, “हमारी मांगें न्यायसंगत हैं। हमने कई बार प्रशासन को चेतावनी दी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हम जल सत्याग्रह कर अपनी आवाज़ मजबूती से उठाएंगे। हम अग्रिम रणनीति जल्द ही सार्वजनिक करेंगे।”
संविदा कर्मचारियों की यह हड़ताल राज्य की राजनीति और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली दोनों के लिए चुनौती पेश करती है। अगर सरकार ने शीघ्र समाधान न निकाला, तो यह आंदोलन और बड़ा स्तर ले सकता है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत और बिगड़ सकती है।
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा NHM के संविदा कर्मचारियों का यह आंदोलन उनकी नौकरी, वेतन और सेवा के अधिकारों के लिए एक निर्णायक संघर्ष है। सरकार के प्रयासों के बावजूद संघर्ष लंबा खिंच रहा है और कर्मचारी संगठन लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह हड़ताल स्वास्थ्य सुरक्षा और संविदा कर्मचारी अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित होगी, जिसमें दोनों पक्षों को समझदारी और संवेदनशीलता से कदम बढ़ाने की जरूरत है।
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