जगदलपुर में NHM कर्मचारी बीएस मरकाम का निधन, हड़ताल पर था संघर्ष, मितानिन दीदियां मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगी : NHM Employee BS Markam Died in Jagdalpur struggle on Strike

Uday Diwakar
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  • जगदलपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ब्लॉक अकाउंट ऑफिसर बीएस मरकाम का 12 दिनों से हड़ताल के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके अचानक निधन से सभी साथी कर्मचारियों में गहरा शोक फैल गया है।
  • बीएस मरकाम की मौत से एनएचएम कर्मचारियों के संघर्ष को नया मोड़ मिला है और मितानिन संगठन ने 4 सितंबर को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का फैसला लिया है, जिससे सरकार की अनदेखी पर सवाल उठे हैं।

NHM Employee BS Markam Died in Jagdalpur struggle on Strike: रायपुर : छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के ब्लॉक अकाउंट ऑफिसर बीएस मरकाम का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 12 दिनों से अपनी मांगे पूरी करने के लिए हड़ताल पर थे। अचानक बीमार पड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी मौत की पुष्टि की। उनकी मृत्यु से सभी साथी बहुत दुखी हैं और उन्होंने उनको श्रद्धांजलि दी।

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NHM Employee BS Markam Died in Jagdalpur struggle on Strike

बीएस मरकाम की अचानक मौत ने हड़ताल में बैठे कर्मचारियों के आंदोलन को नया रूप दिया है। कर्मचारियों ने सरकार पर अपनी मांगों की ओर ध्यान न देने का आरोप लगाया है। वेतन, नियमितीकरण और बेहतर काम के हालात जैसी मांगों को लेकर यह हड़ताल चल रही है।

मितानिन दीदियां, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाती हैं, लंबे समय से अपनी तीन प्रमुख मांगों — मानदेय वृद्धि, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा — को लेकर संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आगामी 4 सितंबर को 75,000 से अधिक मितानिन दीदियां मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगी।

एनएचएम के लगभग 190 कर्मचारी बस्तर क्षेत्र से हड़ताल में शामिल हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर पड़ा है। कई अस्पतालों में इलाज ठप हो गया है, जिससे गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

मरकाम की मौत के बाद, मितानिन संगठन ने 4 सितंबर को रायपुर में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का फैसला लिया है। मितानिन दीदियां भी बेहतर वेतन और सुरक्षा की मांग को लेकर आवाज़ उठा रही हैं। ये महिलाएं गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाएं देती हैं।

मितानिन योजना की शुरुआत 2002 में हुई थी और इसे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत पूरी देश में लागू किया गया। ये स्वास्थ्य कर्मी टीकाकरण, मातृत्व देखभाल और पोषण जैसे काम करती हैं। हड़ताल के कारण ग्रामीण इलाकों में इन जरूरी सेवाओं में बाधा आई है।

सरकार ने बातचीत तो की लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रशासन को चिंता है कि मितानिनों के मुख्यमंत्री निवास घेराव से स्थिति और खराब हो सकती है।

इस घटना ने एनएचएम कर्मचारियों के संघर्ष को और गहरा कर दिया है और सरकार पर दबाव बढ़ा है कि वे उनकी मांगों पर जल्दी ध्यान दें। आने वाले दिनों में हो सकता है आंदोलन और व्यापक हो जाए और इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और बढ़े।

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