NHM Employees Warning of Termination of Service: रायपुर : छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लगभग 16,000 से अधिक संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले 13 दिनों से अपनी नियमितीकरण समेत कई मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। यह लंबी हड़ताल राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारी संकट पैदा कर रही है। इसके कारण सरकारी अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं ठप पड़ गई हैं, जिससे लाखों मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
हड़ताल और मांगें
एनएचएम कर्मचारी संघ का कहना है कि उन्हें उनकी सेवा का नियमितीकरण, समान वेतन, बेहतर सेवा शर्तें, और स्थाईकरण की गारंटी नहीं मिली है। कर्मचारी पिछले कई वर्षों से संविदा पर कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें स्थाई कर्मचारी मानने में सरकार आनाकानी कर रही है। विधानसभा चुनाव 2023 के समय भाजपा ने ‘मोदी की गारंटी’ के तहत 100 दिनों में नियमितीकरण का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके कारण कर्मचारियों में नाराजगी और हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हो गया।
NHM Employees Warning of Termination of Service
हड़ताल के चलते राज्य के अधिकांश अस्पतालों में ताले लटक रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हैं। टीकाकरण, प्रसव सहायता, आपातकालीन सेवाओं समेत अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रम बाधित हुए हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह स्थिति और गंभीर है, जहां गरीब लोग निजी अस्पतालों की ओर मजबूर हो चुके हैं।
जगदलपुर में हड़ताल के दौरान ब्लॉक अकाउंट मैनेजर बीएस मरकाम की अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई, जिसने हड़ताली कर्मचारियों में गहरा शोक और आक्रोश पैदा कर दिया है। इससे आंदोलन नई ऊर्जा के साथ तेज हो गया है।
काम पर न लौटने पर सेवा समाप्ति की चेतावनी
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस हड़ताल को लेकर अल्टीमेटम जारी किया है। विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को आदेश दिया है कि हड़ताली कर्मचारी तुरंत काम पर लौटें। काम पर लौटने में विफल रहने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उनके सेवा समाप्ति के आदेश भी शामिल हैं। साथ ही, इस दौरान वेतन भुगतान रोका जाएगा।
कर्मचारी संघ का दावा है कि वे सरकार के वादाखिलाफी के खिलाफ मजबूरन यह कदम उठा रहे हैं। वे कहते हैं कि कोरोना महामारी में उनके योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है जबकि उन्होंने अपने जीवन को खतरे में डालकर जनता की सेवा की है। उन्होंने PPE किट पहनकर बाजार में भीख मांगने जैसा विरोध प्रदर्शन भी किया ताकि सरकार और जनता के ध्यान में अपनी समस्या ला सकें।
29 अगस्त को उन्होंने ‘मोदी की गारंटी खोज अभियान’ शुरू किया, जिसमें राजधानी रायपुर से लेकर जिले तक अपने पैरों पर चलकर सरकार से अपने वादों को पूरा करने की मांग की गई। करीब 2 लाख पंपलेट वितरित किए गए, जिनमें जनता को सरकार के वादों और कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारियों के बीच संवाद अभी तक निष्प्रभ रहा है। सरकार की कड़ी चेतावनी और कर्मचारियों का अडिग रुख दोनों पक्षों के बीच टकराव को जन्म दे रहा है। अगर शीघ्र समाधान नहीं निकला तो हड़ताल और लंबी हो सकती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और अधिक प्रभावित होगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के बीच जल्द ही किसी प्रकार के मध्यस्थता प्रयास की उम्मीद की जा रही है, ताकि प्रदेश की जनता को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें।
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है। नियमितीकरण और उचित कामकाजी शर्तों की मांग जायज़ है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका विपरीत प्रभाव राज्य की जनता के लिए चिंता का विषय है। सरकार और आंदोलनकारी कर्मचारियों दोनों को संवेदनशीलता के साथ बातचीत कर जल्द समाधान निकालना होगा ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकें और जनता को राहत मिल सके।
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