छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की नई स्थायी अध्यक्ष बनीं रीता शांडिल्य, रिटायर्ड IAS अधिकारी को मिली नियुक्ति : Rita Shandilya Became the New Permanent Chairperson of CGPSC

Uday Diwakar
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  • रीता शांडिल्य, जो 2002 बैच की रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं, को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का स्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे पहले आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में दायित्व संभाल रही थीं।
  • उनकी नियुक्ति राज्यपाल के आदेश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी की गई अधिसूचना के माध्यम से प्रभावी हो गई है, जिससे आयोग को स्थिर और अनुभवी नेतृत्व मिला है।

Rita Shandilya Became the New Permanent Chairperson of CGPSC: रायपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को नया स्थायी अध्यक्ष मिल गया है। राज्यपाल के आदेश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 2002 बैच की रिटायर आईएएस अधिकारी रीता शांडिल्य को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का स्थायी अध्यक्ष नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। रीता शांडिल्य इससे पहले आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर काम कर रही थीं। उनकी यह नियुक्ति तुरंत प्रभाव से लागू मानी जाएगी।

Rita Shandilya Became the New Permanent Chairperson of CGPSC

रीता शांडिल्य एक अनुभवी और प्रतिष्ठित आईएएस अधिकारी हैं जो 2002 बैच की छत्तीसगढ़ कैडर अधिकारी रह चुकी हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। पेशे से गणित में बीएससी, भौतिकी में एमएससी और एमफिल की उपाधि प्राप्त रीता शांडिल्य का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक है। उन्होंने कलेक्टर, राजस्व विभाग, आपदा प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग जैसे विभिन्न विभागों में कार्य किया है और अपनी प्रतिबद्धता तथा दक्षता के लिए जानी जाती हैं।

रीता शांडिल्य ने 2024 में अपनी सेवा निवृत्ति के बाद भी राज्य सरकार द्वारा उन्हें अक्टूबर 2024 से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने आयोग के विकास और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब उनकी स्थायी अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति राज्य सरकार की ओर से आयोग को मजबूती प्रदान करेगी।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग छत्तीसगढ़ सरकार के तहत आने वाला एक महत्वपूर्ण संगठन है, जो राज्य में लोक नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है। अध्यक्ष का पद एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाला पद होता है जिसे किसी भी प्रशासनिक आयोग की कार्यकुशलता के लिए मुख्य माना जाता है। रीता शांडिल्य की नियुक्ति से आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

इससे पहले आयोग की अध्यक्षता डॉ. प्रवीण वर्मा के हाथ में थी, जो पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान इस पद पर नियुक्त हुए थे। डॉ. वर्मा के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठे थे। हालांकि, अब रीता शांडिल्य की नियुक्ति के साथ आयोग को स्थायी नेतृत्व मिला है, जो आयोग की स्थिरता के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

रीता शांडिल्य ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान आपदा प्रबंधन, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनका व्यापक प्रशासनिक अनुभव और विषयगत ज्ञान उन्हें इस भूमिका के लिए योग्य बनाता है। उनकी नीतिगत समझ और प्रशासनिक कुशलता से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की कार्यक्षमता में सुधार की संभावनाएं बढ़ीं हैं।

राज्य सरकार ने उनकी नियुक्ति के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि रीता शांडिल्य को पदभार ग्रहण करने के साथ ही पूर्ण प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस कदम से लोक सेवा आयोग के संचालन में तेजी और प्रभावशीलता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब छत्तीसगढ़ में लोक सेवा आयोग द्वारा विभिन्न परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं, और कई युवा उम्मीदवारों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। एक मजबूत और सक्षम अध्यक्ष के नेतृत्व में ये प्रक्रियाएं और अधिक पारदर्शी और सुचारू रूप से चल सकेंगी।

छत्तीसगढ़ में रीता शांडिल्य की यह नियुक्ति राज्य प्रशासन में महिलाओं की भूमिका को भी बढ़ावा देती है। वे न केवल प्रशासनिक क्षेत्र में सफल आईएएस अधिकारी हैं बल्कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्था का नेतृत्व कर रही हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश में महिला सशक्तिकरण पर भी पड़ेगा।

इस प्रकार, रीता शांडिल्य की नियुक्ति छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के लिए एक नए युग की शुरुआत है। उनके नेतृत्व में आयोग की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता में बढ़ोतरी होगी, जिससे राज्य की लोक सेवा परीक्षाओं का संचालन और बेहतर होगा। यह नियुक्ति छत्तीसगढ़ प्रशासनिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

रीता शांडिल्य का समर्पित और योग्य नेतृत्व राज्य के युवाओं के लिए बेहतर रोजगार अवसर सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा, तथा सेवा की गुणवत्ता को भी सुनिश्चित करेगा। उनका अनुभव और ज्ञान आयोग की नीतियों और प्रक्रियाओं को और पारदर्शी बनाने में सहायक होगा।

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