IMA will Stop Cashless Treatment with Ayushman Card in private hospitals in CG from September 1: रायपुर : छत्तीसगढ़ में आयुष्मान कार्ड के जरिए कैशलेस इलाज की सुविधा बंद होने को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने बताया है कि 1 सितंबर 2025 से प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से इलाज का कैशलेस लाभ खत्म कर दिया जाएगा। इसका सीधा असर गरीब और आम लोगों पर पड़ेगा जो इस योजना के तहत इलाज कराते हैं।
आयुष्मान भारत योजना का मकसद गरीब और जरूरतमंद लोगों को बिना पैसे दिए इलाज दिलाना है। इसके तहत उन्हें एक कार्ड दिया जाता है, जिससे वे सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में फ्री इलाज करवा सकते हैं। अस्पताल सरकार से सीधे पैसे लेते हैं और मरीज को कोई खर्च नहीं करना पड़ता।
IMA will Stop Cashless Treatment with Ayushman Card in private hospitals in CG from September 1
IMA ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि अस्पतालों को पिछले कई महीनों से इस योजना के तहत इलाज का पैसा सरकार से समय पर नहीं मिल रहा है। भुगतान में देरी के कारण अस्पतालों को आर्थिक परेशानी हो रही है, इसलिए वे अब इस सुविधा को बंद कर रहे हैं।
अगर यह सेवा बंद हो जाती है तो गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इलाज के लिए ज्यादा पैसे देने को मजबूर होंगे। इससे उनका इलाज करवाना मुश्किल हो जाएगा और उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह अस्पतालों को जल्द से जल्द भुगतान करेगी ताकि इस सेवा को बंद होने से रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सितंबर से पहले वे अस्पतालों का भुगतान कर देंगे।
इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को भुगतान की प्रक्रिया को और आसान और तेज बनाना होगा। साथ ही IMA और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर काम करना होगा ताकि जल्द से जल्द समस्या का हल निकले। डिजिटल तरीके से भुगतान करने से भी काम जल्दी होगा।
स्वास्थ्य सेवा हर किसी का अधिकार है, खासकर गरीबों का। अगर आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा बंद हो गई तो गरीब लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी। इसलिए सरकार और अस्पतालों को साथ मिलकर इसकी व्यवस्था को बनाए रखना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में इस सेवा को बंद होने से बचाने के लिए जल्द ही सरकार और IMA के बीच बात होनी चाहिए। अस्पतालों को समय पर पैसे मिले ताकि वे गरीबों को इलाज की सुविधा देते रहें।
अगर सही समय पर समस्या का हल नहीं निकला तो इसका नतीजा सिर्फ इलाज तक नहीं रहेगा, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा। इसलिए सभी को मिलकर इस मुद्दे का जल्दी और सही समाधान ढूँढ़ना होगा ताकि छत्तीसगढ़ के लोग अच्छी स्वास्थ्य सेवा पा सकें।
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