Fourth Sawan Shringar Mela 2025 at Alankar Hotel Ambikapur: अम्बिकापुर :अलंकार होटल, अंबिकापुर में वर्ष 2025 में चौथे वर्ष के लिए भव्य सावन श्रृंगार मेले का आयोजन किया गया। यह मेला खास तौर पर महिलाओं और स्थानीय समाज के लिए सावन माह की पारंपरिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं को एक साथ जीने का अवसर लेकर आता है। आयोजन को लेकर शहर में खासा उत्साह देखा गया और यह कार्यक्रम अब अंबिकापुर के सांस्कृतिक कैलेंडर का जरूरी हिस्सा बन चुका है।
Fourth Sawan Shringar Mela 2025 at Alankar Hotel Ambikapur
कार्यक्रम का नाम: सावन श्रृंगार मेला।
आयोजक: सविता सिंह, पार्थ इवेंट्स की संस्थापक।
उद्देश्य:
यह कार्यक्रम विशेष रूप से महिलाओं के लिए आयोजित किया जाता है ताकि वे अपनी छिपी हुई प्रतिभा को एक मंच पर प्रदर्शित कर सकें और खुलकर आनंद उठा सकें।
इतिहास: यह इस कार्यक्रम का चौथा सफल वर्ष है।
अवधारणा: कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को प्रोत्साहित करना है। इसमें किसी को भी उनके रूप, रंग या आकार के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा के आधार पर परखा जाता है।
गतिविधियाँ: महिलाएं अपनी विभिन्न प्रतिभाओं का प्रदर्शन करती हैं, और विजेता को “सावन सुंदरी” का खिताब दिया जाता है।
लक्ष्य:
यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए एक शुरुआती मंच के रूप में काम करता है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। सविता सिंह ने उल्लेख किया कि यहां से निकली महिलाएं थाईलैंड, बैंकॉक और गोवा जैसे स्थानों पर भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं।
पार्थ इवेंट्स का दर्शन:
पार्थ इवेंट्स हमेशा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कुछ नया और अनोखा कार्यक्रम आयोजित करने का प्रयास करता है।
इस बार मेला 20 जुलाई 2025, रविवार को अलंकार होटल परिसर में दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित हुआ। इसका संयोजन ‘Parth Events’ संस्था और स्थानीय महिला संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। आयोजन स्थल को पारंपरिक रंग-बिरंगे झूमर, फूलों, रेशमी गोटों और थीमेटिक सजावट से बेहद आकर्षक रूप में सजाया गया था।
मेले का मुख्य आकर्षण ‘सोलह श्रृंगार’ प्रतियोगिता रही, जिसमें बड़ी संख्या में शहर की महिलाओं ने पारंपरिक श्रृंगार में अपने कला-कौशल का प्रदर्शन किया। सुंदर वस्त्र, गहनों, मेहंदी और चूड़ियों से सजी–संवरी महिलाओं की प्रस्तुति ने आयोजन को बेहद जीवंत बना दिया। इसके अलावा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकगीत, नृत्य, समूह गीत और नाटक की प्रस्तुतियाँ दीपावली की तरह आयोजन को रोशन कर गईं।
श्रृंगार थीम के अनुरूप मेले में रेशमी दुपट्टे, राखी, पारंपरिक मेहंदी, हाथों की कलात्मक सजावट, चूड़ियाँ, तथा अन्य श्रृंगारिक वस्तुओं के स्टॉल्स लगाए गए। महिलाएँ और किशोरियाँ इनमें भारी रूचि दिखाती दिखीं। इसके साथ ही खानपान, हस्तशिल्प और मिठाइयों के भी कई स्टॉल्स थे, जहाँ प्रतिभागियों ने स्थानीय व्यंजन का स्वाद लिया।
सावन माह की धार्मिकता और सांस्कृतिक छटा आयोजन की जान रही। शिवालय में अभिषेक, भजन, आरती जैसे पूजन आयोजन भी हुए। महिलाओं के लिए यह न सिर्फ धार्मिकता का अवसर था, बल्कि अपने साथी, पड़ोसी और परिवारजन के साथ नेटवर्किंग का भी बड़ा माध्यम बना। नई पीढ़ी की बच्चियों एवं युवतियों के लिए सम्मिलित होकर भारतीय संस्कृति, तीज–त्यौहार तथा पारंपरिक श्रृंगार के महत्व को जानने–सीखने का मौका भी बना।
आयोजन की व्यवस्थाओं में महिला सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, प्राथमिक चिकित्सा और बच्चों की विशेष देखभाल जैसे इंतजाम किया गया। सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता के विजेताओं को ट्रॉफी, नकद पुरस्कार, स्मृति-चिह्न एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ गया।
इस प्रकार, चौथे वर्ष आया सावन श्रृंगार मेला आज नारी-सशक्तिकरण, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक परंपराओं के संर्वद्धन के लिए अंबिकापुर की अनूठी मिसाल बन गया है। आयोजक संस्था और स्थानीय समाज ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे भविष्य में और भी भव्य अंदाज में ऐसे सांस्कृतिक मेलों की आशा की जा सकती है।
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